कतर गरीबी से फुटबाल विश्वकप के आयोजन तक कैसे पहुँचा

 


12000 वर्ग मीटर मे फैला कतर बसावस के पैमानों पर खरा नहीं उतरता था, यहाँ रहने वालों में बड़ी तादात  मछुहारों और मोती चुनने वालों की थी , सन् 1930 -40 में भयानक आर्थिक संकट ने देश को घेर लिया ।

जब जापानी लोगों ने मोती की खेती और व्यापारिक उत्पादन शुरु किया , जिससे कतर की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी । जिससे लगभग 3- प्रतिशत लोगों ने कतर से पलायन कर दिया , लेकिन उसके बाद कतर की अर्थव्यवस्था में एक यू टर्न आया जिससे कतर की अर्थव्यवस्था जादुई रूप से बदल गयी,  कतर में तेल रिजर्व पाए गए, जिससे

कतर के खजाने में वृद्धि हुई जिससे कतर दुनिया के अमीर देशों में शुमार हो गया , तेल का पहला भंड़ार 1939 में खोजा गया और इसे कतर का ब्लैक गोल्ड कहा गया , उस समय कतर अंग्रेजों के नियन्त्रण में था , जिससे वहाँ तेजी से बदलाव और आधुनिकीकरण चालू हो गया ,

प्रवासी और निवेशकों भी  कतर में आने लगे ,  1950  में कतर की आबाद 25000  से भी कम थी ,  जो 1970 तक एक लाख तक पहुँच गयी , 1970 में कतर की  जीडीप  300 मिलियन अमेरिकी डालर तक पहुँच गयी , 1970 में देश को अंग्रेजों से आजादी मिली , 1971 में इंजीनियों ने विशाल प्राकृतिक गैस फील्ड की घोषणा की , जो कि धरती का सबसे बड़ा गैस रिजर्व था,

कतर की जीडीपी 3.7 से 19.2 प्रतिशत हो गयी , कतर ने विश्व कप के आयोजन के लिए 2 लाख मिलियन डालर खर्ज किया है , जो अब तक का सबसे महँगा विश्वकप है।  

हिन्दी व्याकरण    संज्ञा     

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