सद्गुरु ने काशी से भरी हुँकार

 


गंगा की खूबसूरती अतुलनीय है , गंगा इस समय पूरे प्रवाह से बह रही है ,  थोड़ी मिट्टी भी साथ में बह रही है , परन्तु अपने पूरे वेग से बह रही है , य़ह एक शानदार जगह है , हमें इसे इसके पुराने वैभव पर पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है । 

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इस धऱती पर काशी जितना गहन कुछ भी नहीं है , कालान्तर में समय बीतने से और हमलों से काशी में काफी कुछ नष्ट हो गया है ।  काशी को पुनः स्थापित करने का समय आ गया है यह कोई धर्म नहीं है , मनुष्य़ के कल्याण के लिए इसे पुनः स्थापित करना ही होगा ।  मनुष्य के कल्याण के लिए जो प्रक्रियाएं बनायी गयी थीं उसे एक बार फिर से वापस लाने की आवश्यकता है । 

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